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भारत सरकार इस योजना के अंतर्गत अगले तीन साल में कुल 1 करोड़ पक्के माकन बनाएगी। योजना के तहत बनाये जाने वाले 1 करोड घरों के लिए सरकार 2018-19 तक 1,30,075 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद प्रदान करेगी।

कुल लक्ष्य 4 (योजना के तहत बनाये जाने वाले घरों की संख्या को बढाकर अब 3 करोड से 4 करोड कर दिया गया है) करोड़ घर बनाने का रखा गया है जिसे 2022 तक पूरा किया जाना है।

अगले तीन साल के लिए भारत सरकार ने 1,30,075 करोड़ रूपए का बजट तय किया है जो की योजना को 2016-17 से लेकर 2018-19 तक लागू करने में काम आएगा।

2018-19 तक होने वाले कुल लागत में केंद्रीय अंश 81,975 करोड़ रुपये का होगा जिसमें से 60,000 करोड़ रुपये की पूर्ति बजटीय सहायता के द्वारा तथा बाकी 20,000 करोड़ रुपये की पूर्ति कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक से लोन लेकर की जायेगी।

घर के निर्माण में आने वाली लागत को 60:40 के अनुपात में केंद्र और राज्य सरकार के बीच बांटा जाएगा. उत्तर – पूर्वी व पहाड़ी क्षेत्रों में इसे 90:10 के अनुपात में बांटा जाएगा।

योजना के अंतर्गत लाभार्थी का चुनाव घरों की कमी और सामाजिक आर्थिक जाति जनगणना 2011 के डेटा में दर्शाये गए अन्य सामाजिक अपवर्जन मानदंडों के अनुसार किया जाएगा जिसमें राज्य सरकारों की भी मदद ली जायेगी।

भारत सरकार योजना के अंतर्गत सभी लाभार्थियों को घर बनाने के लिए 1.20 लाख और पहाड़ी जगहों (जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड) पर 1.30 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।

इस योजना के तहत लाभार्थी को स्वच्छ भारत मिशन – ग्रामीण और मनरेगा के तालमेल के माध्यम से घर में है शौचालय बनाने के लिए 12,000 रुपये की अतिरिक्त मदद का प्रावधान है

घर के क्षेत्रफल को 20 से 25 वर्ग मीटर कर दिया जाएगा जिसमें की स्वच्छ खाना पकाने के लिए अलग से स्थान भी शामिल होगा।

वित्तीय सहायता की रकम सीधा लाभार्थी के बैंक या डाकघर के बचत खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। लेकिन यह याद रहे की लाभार्थी के खाते में लाभार्थी की सहमति से उसके आधार संख्या की संबद्धता कर दी गयी हो।

लोन राशि को 70000 रुपये से बढाकर अब 2 लाख रुपये कर दिया गया है, नयी लोन योजना के तहत अब प्रधान मंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थी 2 लाख रुपये तक का लोन ले सकते

हैं और उनको इस होम लोन पर ब्याज में 3% की छूट भी दी जायेगी बशर्ते ये लोन नया घर बनाने अथवा घर के विस्तार के लिए लिया गया हो।

प्रधान मंत्री आवास योजना – ग्रामीण के तहत बनाये जाने वाले घरों को बुनियादी सुविधाएं जैसे की शौचालय, पेयजल, बिजली, स्वच्छ एवं कुशल ईंधन, तरल अपशिष्ट के शोधन आदि प्रदान

करने के लिए अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लिया जाएगा।

योजना के तहत भारत सरकार ने एक तकनीकी सहायता एजेंसी (NTSA) का भी गठन किया है जो कि लाभार्थी को वित्तीय सहायता के अलावा मकान के निर्माण में तकनीकी सहायता भी प्रदान करेगी।

अच्छे निर्माण मजदूर, प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों, स्थानीय सामग्रियों तथा डिजाइनों का उपयोग करते हुए अच्छे घर बनाना योजना के मूल उद्देश्यों में से एक है।

सूक्ष्म वित्त के ऋणदाता और कर्जगृहिता का नियमन और सूक्ष्म वित्त प्रणाली में नियमन और समावेशी भागीदारी को सुनिश्चित करते हुए उसे स्थायित्व प्रदान करना।

सूक्ष्म वित्त संस्थाओं (एमएफआई) और छोटे व्यापारियों, रिटेलर्स, स्वसहायता समूहों और व्यक्तियों को उधार देने वाली एजेंसियों को वित्त एवं उधार गतिविधियों में सहयोग देना।

सभी एमएफआई को रजिस्टर करना और पहली बार प्रदर्शन के स्तर (परफॉर्मंस रेटिंग) और अधिमान्यता की प्रणाली शुरू करना।

इससे कर्ज लेने से पहले आकलन और उस एमएफआई तक पहुंचने में मदद मिलेगी, जो उनकी जरूरतों को पूरी करते हो और जिसका पुराना रिकॉर्ड सबसे ज्यादा संतोषजनक है।

इससे एमएफआई में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। इसका फायदा कर्ज लेने वालों को मिलेगा।

कर्ज लेने वालों को ढांचागत दिशानिर्देश उपलब्ध कराना, जिन पर अमल करते हुए व्यापार में नाकामी से बचा जा सके या समय पर उचित कदम उठाए जा सके।

डिफॉल्ट के केस में बकाया पैसे की वसूली के लिए किस स्वीकार्य प्रक्रिया या दिशानिर्देशों का पालन करना है, उसे बनाने में मुद्रा मदद करेगा।

मानकीकृत नियम-पत्र तैयार करना, जो भविष्य में सूक्ष्म व्यवसाय की रीढ़ बनेगा।

सूक्ष्य व्यवसायों को दिए जाने वाले कर्ज के लिए गारंटी देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम बनाएगा।

वितरित की गई पूंजी की निगरानी, कर्ज लेने और देने की प्रक्रिया में मदद के लिए उचित तकनीक मुहैया कराएगा।

छोटे और सूक्ष्म व्यवसायों को प्रभावी ढंग से छोटे कर्ज मुहैया कराने की प्रभावी प्रणाली विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत उपयुक्त ढांचा तैयार करना।

मुद्रा बैंक ने कर्ज लेने वालों को तीन हिस्सों में बांटा हैः व्यवसाय शुरू करने वाले, मध्यम स्थिति में कर्ज तलाशने वाले और विकास के अगले स्तर पर जाने की चाहत रखने वाले।

इन तीन हिस्सों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मुद्रा बैंक ने तीन कर्ज उपकरणों की शुरुआत की हैः

शिशुः इसके दायरे में 50 हजार रुपए तक के कर्ज आते हैं।

किशोरः इसके दायरे में 50 हजार से 5 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।

तरुणः इसके दायरे में 5 से 10 लाख रुपए तक के कर्ज आते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक और फ्लैगशिप सामाजिक सुरक्षा योजना शुरू की हैः

प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाय): यह एक दुर्घटना मृत्यु और विकलांगता बीमा योजना है।

भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों में रहता है और उनमें से ज्यादातर किसी भी सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में नहीं आते।

इस आबादी के एक बड़े तबके को तो अब तक बैंकिंग प्रणाली का भी लाभ नहीं मिला है।

ज्यादातर को अब भी समय-समय पर शुरू की गई कई सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं मिली है।

साधारण और गरीब लोगों की जिंदगी में शामिल इस गंभीर असंगति को ठीक करने के लिए भारत के प्रधान मंत्री ने 9 मई 2015 को कोलकाता में पीएमएसबीवाय योजना शुरू की।

इसके साथ ही दो अन्य बीमा और पेंशन योजनाएं भी शुरू की गई।

इन योजनाओं को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है।

कि इनकी सफलता के लिए वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों को राज्यों की राजधानियों और बड़े नगरों में भेजा गया। ताकि एक साथ कई जगहों से इन योजनाओं का शुभारंभ हो सके।

साथ ही सफल क्रियान्वयन भी सुनिश्चित हो सके।

पूर्ववर्ती सरकारों की ओर से शुरू की गई अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से यह योजना किस तरह अलग है?

पीएमएसबीवाय के दो प्रमुख पहलू है, इससे इसके पेष करने का नजरिया अलग हो जाता है।

पहला, समावेशन का शुद्ध आकार और गहराई, इस योजना का फायदा अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना, जो इसे बहुत महत्वाकांक्षी और चुनौतीपूर्ण बनाता है।

आज, यदि किसी परिवार का कमाऊ सदस्य दुर्घटना में स्थायी रूप से विकलांग हो जाता है या उसकी मृत्यु हो जाती है।

तो उसके परिवार को गरीबी और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

सहयोग या संरक्षण के लिए कोई संस्था या समूह आगे नहीं आता।

पीएमएसबीवाय योजना में शामिल होकर और सिर्फ 12 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष प्रीमियम चुकाकर वह बीमा कवर हासिल कर लेगा।

दुर्घटना में मौत या स्थायी तौर पर विकलांगता पर दो लाख रुपए या आंशिक लेकिन स्थायी विकलांगता होने पर एक लाख रुपए का बीमा मिलेगा।

यह योजना एक साल के लिए वैध रहेगी। इसका हर साल नवीनीकरण किया जा सकता है।

बहुत-सी सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को घर के पास वित्तीय प्रणाली अधोसंरचना की कमी की वजह से लोगों से अच्छा प्रतिसाद नहीं मिला।

इतना ही नहीं, खाते खोलने या दावे करने में जो कागजी कार्यवाही करनी पड़ती थी, वह बहुत ज्यादा थी।

यहां तक कि प्रणाली में लीकेज (भ्रष्टाचार) की वजह से भी बड़ा तबका इन योजनाओं का फायदा उठाने से दूर ही रहा। इन समस्याओं को मौजूदा सरकार ने दूर करने की कोशिश की है।

सामाजिक योजनाओं के निष्पादन और तंत्र की निगरानी के लिए टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।

सभी भुगतान हितग्राही के अकाउंट में सीधे होंगे, जिससे भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी नहीं रहेगी।

पीएमएसबीवाय के तहत कौन पात्र है?

18 और 70 वर्ष आयु समूह के बीच का कोई भी व्यक्ति, जिसका बचत बैंक खाता और आधार कार्ड हो, वह इस योजना से जुड़ सकता है।

एक आसान फॉर्म भरना होगा, नॉमिनी का नाम लिखना होगा और आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना होगा।

व्यक्ति को हर साल एक जून से पहले इस योजना में बने रहने के लिए फॉर्म जमा करना होगा। इससे खाता आसानी से सक्रिय किया जा सकता है और पूरा प्रीमियम उसके खाते से खुद-ब-खुद काट लिया जाएगा।

अन्य शब्दों में, व्यक्ति को सिर्फ बैंक खाता खोलना होगा और फिर सुनिश्चित करना होगा कि हर साल 1 जून से पहले कम से कम 12 रुपए खाते में उपलब्ध रहे।

ताकि योजना का नवीनीकरण हो जाए।यदि किसी व्यक्ति को इस योजना का लाभ लंबी अवधि के लिए चाहिए तो उसके पास यह विकल्प भी होगा।

कि वह बैंक को निर्देश देकर योजना के खुद-ब-खुद नवीनीकरण की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

पीएमएसबीवायकौन क्रियान्वित करेगा?

सभी सरकार-प्रायोजित सामान्य बीमा कंपनियां यह योजना पेश करेंगी।

जबकि अन्य बीमा कंपनियों के पास विकल्प होगा कि वह बैंकों के साथ अनुबंध कर इन योजनाओं के तहत प्रोग्राम डिलीवरी में शामिल हो जाए।

क्या मुझे स्कीम में शामिल होने से किसी तरह का टैक्स लाभ होगा?

हितग्राहियों के बैंक खाते से काटी जाने वाली पूरी प्रीमियम धारा 80सी के तहत करमुक्त होगी।

इतना ही नहीं, इस योजना के तहत मिलने वाली एक लाख रुपए तक की राशि धारा 10(10डी) के तहत कर मुक्त होगी।

एक लाख रुपए से ज्यादा राशि होने पर 2 प्रतिशत की दर से टीडीएस काट लिया जाएगा। यदि फॉर्म 15एच या फॉर्म 15जी बीमा एजेंसी में जमा किया तो यह टैक्स नहीं कटेगा।

मौजूदा सरकार को एक ही बार में तीन बड़े सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम शुरू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार का एक साल का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है।

यह महसूस किया गया कि उनके प्रदर्शन का बारीकी से विश्लेषण किया जाएगा। एक साल सत्ता में रहने के बाद भी चुनावी वादों और वास्तविकताओं में बहुत बड़ा अंतर है।

सरकार इस बात को लेकर आलोचनाओं से घिर गई कि सरकार खर्च करने में गति नहीं बढ़ा पा रही है।

खासकर बुनियादी ढांचे और विनिर्माण के क्षेत्र में, जहां इसकी बहुत ज्यादा जरूरत है। संसद में कई विधेयक लंबित हैं, जिनसे इन क्षेत्रों को काफी उम्मीदें हैं।

इनमें गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) और प्रमुख जमीन अधिग्रहण विधेयक शामिल है।

सरकार इस वजह से न केवल इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की घोषणाओं को लेकर उत्सुक थी, बल्कि विभिन्न तबकों में पर्याप्त प्रचार-प्रसार भी चाहती थी।

खासकर उन लोगों के बीच जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।

मोनाको: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वा ने ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन को ‘गेंदबाजी का ब्रैडमैन’ करार दिया है और कहा कि भारत के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में ऑस्ट्रेलियाई टीम को उनसे निपटने की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया को पुणे में 23 फरवरी से भारत के खिलाफ 4 टेस्ट की सीरीज खेलनी है और वा का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया को दबाव में धैर्य कायम रखना होगा और अश्विन की गेंदबाजी से निपटने का तरीका ढूंढना होगा।

वा ने यहां बातचीत के दौरान संवाददाताओं से कहा, ‘अश्विन गेंदबाजी के ब्रैडमैन हैं। वह जो कर रहा है वह शानदार है। मुझे लगता है कि वह ऐसा खिलाड़ी है जिससे हमें निपटना होगा। ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को अश्विन की गेंदबाजी से निपटने के तरीके ढूंढने होंगे। अगर ऑस्ट्रेलिया ऐसा कर पाया तो हमारे पास मौका होगा। खिलाड़ियों को दबाव में धैर्य कायम रखना होगा।’ भारतीय ऑफ स्पिनर की तारीफ करते हुए वा ने कहा, ‘वह अभी जिस तरह खेल रहा है, वह कई रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। अश्विन के आंकड़े बेहतरीन है।’ वा ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के लिए यह सीरीज मुश्किल होगी क्योंकि भारतीय टीम संयोजित है और विराट कोहली की कप्तानी शानदार है।

उन्होंने कहा, ‘भारत अभी काफी अच्छा खेल रहा है और उनकी टीम अच्छी तरह से संयोजित है। सभी अपनी भूमिका में काफी सहज हैं। साथ ही वे स्वदेश में काफी खेल रहे हैं। घरेलू मैदान पर उनको हराना काफी मुश्किल है और पिछले कुछ वषरें में यह साबित हुआ है।’

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