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पेशावर: पाकिस्तान के  पेशावर में चूहे के काटने से एक शिशु की मौत के बाद.

प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के लिए एक चूहे को मारने पर 25 रूपए का इनाम देने की घोषणा की.

सरकार ने तय किया है कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आम लोगों को शामिल किया जाए.

 और हर चूहे को मारने पर प्रोत्साहन के तौर पर 25 रूपए दिए जाएं.

शहर का पानी एवं सफाई सेवा विभाग चार कस्बों में कुछ ऐसे केंद्र स्थापित करेगा जहां मारे गए.

 चूहे इकट्ठा किये जाएंगे और उन्हें मारने वालों को इनाम दिया जाएगा.

चूहे मारने वालों को उनकी इनाम राशि देने में मदद पहुंचाने के लिए मोबाइल सेवाएं भी शुरू की जाएंगी.

घर घर चूहों को मारने वाली दवा वितरित की जाएगी.

पेशावर के जिला नाजिम मुहम्मद आसिम ने बड़े चूहों के आतंक से निबटने के उपायों.

पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलायी थी. ये बड़े चूहे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं बल्कि.  लोगों पर हमला कर और उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाते हैं. ये बड़े चूहे 22-30 सेंटीमीटर तक के हैं.

दिल्ली: बुराड़ी गांव की वर्तमान समस्याओं पर धूल की मोटी परत जमा हो गई है। यही वजह है कि गांव के लोगों को शिक्षा, चिकित्सा, सड़क, गंदगी व जलभराव जैसी बुनियादी समस्याओं से वर्षो से जूझना पड़ रहा है। समस्याओं का समाधान न होने पर लोगों ने गत नगर निगम चुनाव में जनप्रतिनिधि भी बदल डाले। इसके बावजूद हालत नहीं बदले हैं।

जलभराव है सबसे बड़ी समस्या

जलभराव यहां की सबसे बड़ी समस्या है। हल्की बारिश में भी बुराड़ी मुख्य मार्ग पर कौशिक एंक्लेव के पास इतना पानी जमा हो जाता है कि वाहनों का चलना मुश्किल हो जाता है। यह सड़क पहले नगर निगम के अधीन थी, अब लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है। हाल में ही सड़क के किनारे बड़े नाले का निर्माण भी कराया गया है, लेकिन नाला जाम होने से जलभराव की समस्या पैदा हो जाती है। केवल मुख्य सड़क पर ही नहीं, निगम के अधीन गांव की भीतर की सड़कों पर भी जलभराव की समस्या रहती है। गांव में जल निकासी का प्रबंध वर्षो से नहीं है।

भूत बंगला बना बारात घर

बुराड़ी में पांच साल पूर्व सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बारात घर का निर्माण कराया था, लेकिन अब तक इसका इस्तेमाल नहीं हो सका है। सामाजिक समारोहों के आयोजन के लिए बारात घर की बुकिंग के लिए किस विभाग या अधिकारी के पास अर्जी लगाएं, यहां के लोगों को यह भी पता नहीं है। दरअसल, निर्माण होने के बाद अब तक बारात घर की देखरेख की जिम्मेवारी किसी विभाग को नहीं सौंपी गई है। यही कारण है कि यह बारात घर भूत बंगला में तब्दील हो चुका है। इसके हॉल, कमरों व शौचालयों में गंदगी के अंबार देखे जा सकते हैं तो चोर लोहे के बने दरवाजे व खिड़की तक उखाड़ ले गए हैं। इसमें अब आवारा जानवर डेरा जमाए रहते हैं।

सफाई व्यवस्था लचर

गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। सफाईकर्मियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी गांव की गलियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती है। ऐसे में जगह-जगह कूड़ों के ढेर देखे जा सकते हैं।

बुराड़ी का सुन्दर विहार इलाका कुछ समय पहले बिहारी कॉलोनी के नाम से जाना जाता था। कुछ सक्रीय लोगों के कारण आज इस बिहारी कॉलोनी में न सिर्फ एक सक्रीय RWA है बल्कि इसका नाम भी सुन्दर विहार के नाम से दर्ज है।

अधिकांश डीटीसी बसों के आखिरी स्टॉप नत्थूपुरा से करीब पांच किमी की दूरी पर स्थित सुन्दर विहार में न कोई ऑटो चलता है न फटफटिया न ही कोई ग्रामीण सेवा है। यहां आने के लिए अपने निजी वाहन की सख्त जरूरत होती है नहीं तो पैदल ही 5 से 7 किमी का सफर तय करना पड़ता है। यहां के निवासी मुखयतः छतीसगढ़, झारखण्ड आदि राज्यों से आए हुए हैं। वैसे तो इन्हें आए हुए 15 साल से ज़्यादा हो गए हैं लेकिन इनके पहचान पत्र अभी कुछ समय पहले बनकर तैयार हुए हैं।

यहां अधिकांश लोग बुराड़ी गांव के स्थानीय लोगों की ज़मीनों पर काम करके अपनी गुजर बसर करते हैं। यहां फूलों की खेती की जाती है। सुन्दर विहार के अधिकांश हिस्से में अभी भी खाली खेती योग्य ज़मीन है। यहां के निवासी बताते हैं कि वह लोग खेती के लिए ही दिल्ली आए थे। यहां कुल मिलाकर 35 से 40 परिवार रहते हैं जिन्होंने आपस में मिलकर एक आरडब्ल्यूए का गठन किया हुआ है।

इस आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "शिक्षा के अभाव में दिल्ली में होते हुए भी यह क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है। इसे संभालने के लिए ही हम लोग सक्रिय कदम उठा रहे हैं। नेता वोट मांगने तो इस क्षेत्र में पहुंच जाते हैं लेकिन विकास कार्य यहां अभी तक नहीं हुए। आज भी यहां के लोग खेती में प्रयोग होने वाले बोरिंग के पानी पीने को मजबूर हैं।"

सुरेन्द्र आगे बताते हैं, "यहां के बच्चे पहले स्कूल जाने से घबराते थे क्योंकि नज़दीकी प्राइमरी स्कूल यहां से 5 किमी की दूरी पर है और आने जाने के लिए कोई साधन नहीं हैं। छोटे-छोटे पांच साल से 10 साल तक के बच्चों के लिए 5 किमी चलकर जाना एक मुश्किल काम है। अब क्षेत्र के कुछ पढ़े लिखे नौजवान यहां के बच्चों को पढ़ाने के लिए आगे आए हैं।"

यहां की मुख्य समस्या ट्रांसपोर्ट है, साथ ही शिक्षा, बेसिक चीजों का आभाव जैसी बहुत सी चीजों के लिए यहां के लोग समय-समय पर अधिकारियों को पत्र लिख चुके हैं।

लोगों का कहना है कि यहां पानी की समस्या के बारे में स्थानीय नेताओं से जिक्र किया था तो एक दिन के लिए दिल्ली जल बोर्ड का टैंकर भी यहां लाया गया था लेकिन अब दोबारा वही हाल है।

सुरेन्द्र गुंसाई बताते हैं, "आरडब्ल्यूए का मकसद इस कॉलोनी को दिल्ली की अन्य कॉलोनियों की तरह बनाना है। यहां भी नजदीक में कम से कम ऑटो स्टॉप होना चाहिए जहां ग्रामीण सेवा, आरटीवी या इलेक्ट्रिक रिक्शा चलता हो। बाकी बुराड़ी के अन्य क्षेत्रों की तरह यहां भी मेडिकल पुरानी समस्या है। आसपास में सिर्फ एक पाली क्लीनिक है जिसके लिए भी करीब 15 किमी जाना पड़ता है।"

जैसलमेर: जैसलमेर जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता.

इस थाने को 23 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा और अब जा कर इस थाने को थानेदार मिला है.

शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें एक भी मुकदमा रेप का नहीं है.

ये खूबी इस थाने को दूसरे थानों से अलग करता है.

थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब वह गश्त पर निकलते हैं, तब इक्का-दुक्का लोग मिलते हैं.

 अब पहली बार थाने की कमान सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 1993 में सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ थाना खोला गया था.

 तारबंदी के बाद तस्करी पर लगाम भी लगी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है.

 इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

वर्ष 2016 में अब तक कोई मामला नहीं दर्ज हुआ. 2015 में सिर्फ दो मामले दर्ज हुए, वे भी सड़क दुर्घटना के.

वर्ष 2014 में तीन मामले दर्ज हुए, एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का.

राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया .

कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए.

 और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

पुलिस उपाधीक्षक नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा,

‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले,

इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’

बुराड़ी :रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक, स्वाती मालीवाल के खिलाफ FIR दर्जबुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बुराड़ी रेप पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करने के मामले में मालीवाल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने एफआइआर दर्ज कर ली है।

 

बुराड़ी की रहने वाली 14 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता ने रविवार को शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में दम तोड़ दिया। लगातार हालत बिगड़ने पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल के निर्देश पर 1 जुलाई को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

 

पड़ोस वाली महिला बोली छत पर तुम्हारी बहन के साथ हो रहा है रेप...और फिर

इस घटना से क्षुब्ध डीसीडब्ल्यू प्रमुख ने केंद्र और दिल्ली पुलिस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर जमकर भड़ास निकाली। दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्विटर पर लिखा, 'दिल्ली को और कितने निर्भया की जरूरत है? हम अगले निर्भया के मरने का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'लड़की को जबरन जहरीला पदार्थ खिलाया गया जिससे उसके अंदरूनी अंग पूरी तरह खराब हो गए और उसकी काफी दर्दनाक स्थिति में मौत हो गई।' उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा डीसीपी (उत्तर) को नोटिस जारी करने के बाद खुलेआम घूम रहे आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

मालीवाल ने ट्वीट कर कहा, '14-वर्षीय पीड़ित के अभिभावकों के साथ हूं जो काफी गरीब और शोकाकुल हैं। दिल्ली और कितने निर्भया चाहती है? हम सब अगली निर्भया की मौत का इंतजार करते रहते हैं।' उन्होंने कहा, 'गृह मंत्रालय ने महिला सुरक्षा विशेष कार्यबल को दिल्ली में भंग कर जख्म पर और नमक छिड़क दिया।'

 

सौतेले पिता ने कहा मुंबई में है बेटी, लेकिन सच कुछ और ही था

 

किशोरी को पिलाया गया तेजाब

 किशोरी के परिजनों ने आरोपी शिव शंकर (21) पर शीतल पेय में तेजाब या अन्य घातक रसायन मिलाकर पिलाने का आरोप लगाया है। पीड़ित किशोरी बुराड़ी में माता-पिता व छोटे भाई के साथ रहती थी। उसके पड़ोस में दुष्कर्म का आरोपी शिव शंकर भी रहता है जिससे उसकी दोस्ती हो गई थी।

 पिछले साल 21 दिसंबर को वह शिव शंकर के साथ घर से गायब हो गई थी। 2 दिन तक दोनों साथ रहे थे। उसी दौरान शिव शंकर ने उसके साथ दुष्कर्म किया। 24 दिसंबर को घर लौटने पर पिता ने जब किशोरी से पूछताछ की तो उसने बताया कि जब वह घर आने के लिए स्कूल से निकली थी तभी वहां शिव शंकर आ गया। उसने कहा कि तुम्हारे पिता का एक्सीडेंट हो गया है, जल्दी अस्पताल चलो। रास्ते में उसने रुमाल सुंघाया जिससे वह बेहोश हो गई। जब होश आया तो उसने खुद को किसी कमरे में बंद पाया। इसके बाद परिजनों ने बुराड़ी थाने में शिव शंकर के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज करवा दिया।

 

केंद्र से DCW अध्यक्ष का तीखा सवाल, 'आपको और कितने निर्भया कांड चाहिए?

 27 दिसंबर को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, लेकिन पुलिस ने जब तीस हजारी कोर्ट में किशोरी का बयान कराया तो वह अपने पुराने बयान से पलट गई। उसने कहा कि उसके साथ कोई गलत काम नहीं हुआ है और वह अपनी मर्जी से शिव शंकर के साथ गई थी।

 किशोरी के बयान के बाद आरोपी को जमानत मिल गई थी। हालांकि पुलिस ने तीन महीने बाद इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। पुलिस का कहना है कि गत 16 मई को मामले में आरोप तय होना था, लेकिन इससे एक दिन पहले किशोरी फिर शिव शंकर के साथ घर से भाग गई। 10 दिन बाद जब वह घर लौटी तब परिजनों ने उसे घर ले जाने से इन्कार कर दिया। किशोरी ने भी घर जाने से मना कर दिया तब पुलिस ने उसे निर्मल छाया में रखवा दिया था।

 

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