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इंदौर (12 अप्रैल): ये कहानी है डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर से 50 किमी दूर गंधावल की रहने वाली रेवाबाई की है। 2010 में जब उन्हें बैंक से लोन नहीं मिला तो खुद का बैंक खोला और कई महिलाओं को जोड़ा। सात साल बाद अब इसकी 450 गांवों में शाखा हैं। 3 करोड़ से ज्यादा का कर्ज बांटा गया है वो भी बिना गारंटर के। खास बात कर्ज लेने वालों में से एक भी डिफाल्टर नहीं है।

- रेवाबाई खुद अनपढ़ हैं, लेकिन आज सैकड़ों महिलाओं के लिए जीती-जागती मिसाल हैं।

- उनके खोले बैंक से जुड़ीं महिलाओं की सबकी जरूरतें अब पूरी होने लगीं। बैंक को 'आजीविका मिशन' के तहत रजिस्टर्ड कराया गया था, जिसे नाम मिला- 'समृद्धि बैंक'।

- रेवाबाई का सम्मान नाबार्ड और सीएम शिवराज सिंह चौहान पहले ही कर चुके हैं। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली में उनका सम्मान करेंगे।

- नई दिल्ली के प्रगति मैदान पर 14 अप्रैल को 'आजीविका फेयर' प्रोग्राम में रेवाबाई को सम्मान मिलेगा।

- रेवाबाई अब भी लगातार समृद्धि बैंक के कामकाज को विस्तार देने और ज्यादा-से-ज्यादा महिलाओं को इससे जोड़ने में लगी हैं।जिले में पास के गांव की एक और महिला बैंक सखी निरमा सोलंकी को भी सम्मानित किया जाएगा। निरमा ने बैंकों से महिलाओं को जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। वे बीए पास हैं। इलाके में इतनी पढ़ी-लिखी महिला नहीं है इसलिए निरमा को नर्मदा झाबुआ ग्रामीण बैंक ने इलाके के लिए अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है। अब वे महिलाओं को कैश ट्रांजेक्शन करना सीखा रही हैं।

नई दिल्ली (25 दिसंबर): लोकसभा में  सार्वजनिक जगहों पर थूकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कठोर कानून बनाने की मांग की गई।

भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी ने विश्व टीबी दिवस के बहाने थूकने की प्रवृत्ति पर चर्चा की। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून की मांग का सदन में उपस्थित सभी दलों के सांसदों ने समर्थन किया।

लेखी ने शून्यकाल के दौरान कहा कि एनडीएमसी में थूकने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के कई प्रयास किए, लेकिन स्वच्छ भारत अभियान के तहत शौचालय बनाने सहित अन्य प्रावधानों का समर्थन करने वाली मीडिया ने इस मामले में उनका साथ नहीं दिया। लेखी ने कहा कि टीबी का वायरस भी थूक के माध्यम से सबसे अधिक फैलता है।

ऐसे में देश के लिए अब तक महामारी बने रहने वाली टीबी के समूल नाश के लिए सार्वजनिक जगहों पर थूकने के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाना जरूरी है। लेखी ने इस दौरान एड्स सहित कई अन्य बीमारियों से निपटने के मामले में आर्थिक मदद देने वाले नाको सहित कई अन्य एजेंसियों पर भी सवाल खड़ा किया।

 

"इस क्षेत्र के स्वतंत्रता सेनानी राधेश्याम त्यागी और शांति स्वरूप त्यागी को लीड इंडिया का नमन"

आपको जानकर अच्छा लगेगा कि बुराड़ी आज भले ही समस्याग्रस्त क्षेत्र है लेकिन इतिहास में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है। क्या आपको पता है कि बुराड़ी की धरती ने देश को राधेश्याम त्यागी और शांति स्वरूप त्यागी, दो स्वतंत्रता सेनानी दिये। इतना ही नहीं महाभारत काल में महान धनुर्धर अर्जुन ने बुराड़ी में ही शिव की उपासना की थी।

इसके नाम की तो और भी रोचक कथा है। महाभारत काल में आज के बुराड़ी में भगवान श्री कृष्ण आये थे और इस जगह का नाम मुरारी पड़ा। लेकिन कालांतर में यह नाम मुरारी से बुराड़ी हो गया। और बुराड़ी ने भी अपने गौरवशाली इतिहास को खंगालने की कोशिश नहीं की। लीड इंडिया का गुड न्यूज़ सेक्शन उसी गौरवशाली इतिहास से पर्दा हटाने का एक छोटा सा प्रयास है, जिसे आने वाले अंक में विस्तार से प्रकाशित किया जाएगा

 

नई दिल्ली(18 मार्च): राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा तीन तलाक के खिलाफ चलाए गए अभियान में करीब 10 लाख मुसलमानों ने हस्ताक्षर किए हैं।

 

-  अभियान को मुस्लिम महिलाओं का भारी समर्थन मिल रहा है।

 

- दरअसल, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट मिलने का दावा किया जा रहा है।

 

- इसके पीछे भाजपा द्वारा उठाए गए तीन तलाक के मुद्दे को बड़ी वजह माना जा रहा है। इस मुद्दे पर भाजपा को मुस्लिम महिलाओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

 

- हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मुद्दे का विरोध करता रहा है। आरएसएस नेता और प्रचारक इंद्रेश कुमार का कहना है कि तीन तलाक के मुद्दे पर राष्ट्रव्यापी चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लिए जरूरी है कि तीन तलाक को खत्म कर एक सुधारवादी कदम उठाया जाए।

 

- ऐसा माना जा रहा है कि महिला सशक्तीकरण के इस युग में मुस्लिम महिलाओं ने अपना हित देखकर भाजपा को विधानसभा चुनावों में वोट दिया है। पिछले कुछ समय से तीन तलाक के मुद्दे को जोर-शोर से उठाकर भाजपा इन महिलाओं की हितैषी बन गई है।

 

- बाद पश्चिम से विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि पार्टी द्वारा शुरू की गई योजनाओं ने महिलाओं को काफी प्रभावित किया है। इसमें उज्ज्वला योजना के तहत गरीब महिलाओं को गैस सिलेंडर मिले तो स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर-घर शौचालय बनाए गए।

 

- एमआरएम के राष्ट्रीय समन्वयक मोहम्मद अफजल ने हस्ताक्षर अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि देश में बदलाव आ रहा है। महिलाएं अपनी आजादी के प्रति जागरूक हो रही हैं और भाजपा सरकार उनकी दबी हुई आवाज को उठा रही है, इसलिए उसे समर्थन मिल रहा है। कहा कि तीन तलाक और इसी तरह की अन्य सामाजिक बुराइयों को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

 

- एमआरएम के अभियान को भारतीय मुस्लिम कांग्रेस लीडर मौलाना अबुल कलाम आजाद के पोते ने भी सराहा। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमानों के हित में सोचते हैं, लेकिन उलेमा मुस्लिम समाज को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। तीन तलाक जैसी सामाजिक बुराइयों को खत्म किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली: दिल्‍ली के एक उबर ड्राइवर की सोशल मीडिया पर आजकल काफी चर्चा है। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें  दिल्‍ली में तो बहुत से उबर ड्राइवर हैं क्‍या खास है?

 

दरअसल ये उबर ड्राइवर एक महिला है। जिनका नाम है शन्‍नो बेगम। शन्‍नो बेगम दिल्‍ली में उबर टैक्‍सी सर्विस की पहली महिला ड्राइवर हैं। शन्‍नो ज्‍यादा पढ़ी-लिखी नहीं हैं, इसलिए अपने पति की मौत के बाद उन्‍होंने ड्राइवरी सीखी  थी इसे अपना पेशा बनाया।

शन्नो बेगम  के तीन बच्‍चे हैं। शन्नो बेगम  का कहना है की जब उन्‍होंने इसे पेशे के तौर पर अपनाया तो उन्‍हें काफी सवालों का सामना करना पड़ रहा था । पर उन्होंने अपने बच्‍चों के पालन-पोषण के लिए वही किया जो उन्‍हें सही लगा।

 

असल जिंदगी में है काफी मददगार

शन्‍नो बताती कहना हैं कि आजाद फाउंडेशन नाम के एक एनजीओ ने उनकी काफी मदद की। उनकी मदद से शन्‍नो ने ड्राइविंग भी सीखी। उन्‍होंने पहले दो साल मेहनत करके 10वीं पास की और फिर ड्राइविंग में करियर बनाया।

 

शन्‍नो की कहानी कराती है कठिनाइयों से रूबरू

पति के गुजरने के बाद उन्होंने सबसे पहले सब्‍जी बेचने का काम किया पर जो आमदनी होती थी उससे बच्‍चों को पालना मुश्किल होने लगा। फिर वो एक अस्‍पताल में काम करने लगी लेकिन वहां से भी आमदनी इतनी नहीं हुई कि वे बच्‍चों को पढ़ा सकें तो उसने घरों में खाना पकाने का काम शुरू किया। जिससे से वे 6 हजार रुपए प्रतिमाह कमा लेती थीं लेकिन यह भी उनके लिए काफी नहीं था।

हमारा देश तो 15 अगस्त 1947 को ही फिरंगियों से आज़ाद हो गया था लेकिन हम मासूम जनता को क्या पता था की “घर का भेदी लंका ढाए” वाली कहावत हम लोगो पर भी दोहराई जा सकती है |एक ओर जहाँ हम 15 अगस्त यानी भारत की आज़ादी की खुशियाँ मनाते है तिरंगे को शान से फहराते है, तोपों की सलामी देते है और भारत माता की जय बोल कर अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है वही दूसरी ओर तिरंगे को जलाया जाता है सैनिकों पर पत्थर बरसाये जाते है और भारत मुर्दाबाद , भारत तेरे टुकड़े होंगे इन्शा-अल्लाह इन्शा-अल्लाह और न जाने क्या -क्या नारे लगाये जाते है |लेकिन मजाल की देश के सत्ता -आशिन कुछ कर जाएँ इन आस्तीन के सांपो पर |

अगर सही कहा जाए तो आज हमारा देश पूरी तरह से आतंकवाद , उग्रवाद , नक्सलवाद और सबके पितामाह नेतावाद (राजनीति ) में सुलग रहा है |आप सोच रहे होंगे की मैं ये क्या बोल रहा हूँ ? लेकिन ये सत्य है आए दिन देश में ऐसी -ऐसी घटना घट जाती है जिस से आप अनभिग नहीं होंगे |हरियाणा की ही एक घटना को ले लीजिये जिसमे एक लड़की से तीन साल पहले रेप किया जाता है और फिर तीन साल बाद उसी लड़की से वही रेपिस्ट रेप करता है कितनी दुखद और अविस्वास्निय घटना है !

हरियाणा ही क्यों आप भारत के किसी भी राज्य को ले लीजिये जहाँ आए दिन भयावह और दिल को दहला देने वाली घटना न घटती हों ! क्या हमारे देश में शासन नहीं है , प्रशासन नहीं है , कानून नहीं है ? सब कुछ है तो क्यों घटती हैं घटना ?

क्योकि इस के पीछे भी कारण है आज – कल सभी बिकाऊ हो गये है आप कितना भी जघन्य अपराध कर के क्यों न आये हो टेबल के नीचे से प्रशाद बढ़ा दीजिये और घर पे मज़े लिजिए | इसे छोड़िये ये तो अब आम बात हो गई है लेकिन अब तो सीधे जड़ पे ही वार किया जाता है जिसे देश का भविष्य कहा जाता है अब तो उसे भी नहीं छोड़ा जाता उसकी जिन्दगी से भी खिलवाड़ किया जाने लगा हैं |

आज एक ओर शिक्षा और एक ओर इस शिक्षा को पाकर देश को उन्नती की राह पर ले जाने वाले दोनों का संबंध-विच्छेद किया जा रहा है वह भी उनके हाथों जिसे हमारे यहाँ भगवान् से भी ऊँचा दर्जा दिया गया है अगर कुम्हार घड़ा बनाने में ही छल करना शुरु कर दे , तो क्या कुम्हार द्वारा बनाए गए घड़े से हम काम ले सकते है नहीं ना ! आज बिहार की घटना को लीजिये जिस छात्रा को पोलिटिकल साइंस की स्पेलिंग नहीं आती उसे बिहार का टॉपर बना दिया जाता है यानी अब शिक्षा भी पैसों की मोहताज़ हो गया |

जहाँ एक ओर ( RTE ) राईट टू एजुकेशन है वही शिक्षा माफ़िया इस की आड़ में अपना महल खड़ा कर रहें है शिक्षा के नाम पर बड़े -बड़े ट्रस्ट और NGO खोले जाते है और ज़ाकिर नाइक , आरएसएस , ओवैसी जैसे लोग अनाप -सनाप बोल के कचरमबद्ध करवाने पे तुले हुए होते हैं |

मैं कहता हूँ क्यो हो रहे है ये सब क्योंकि जब बाप ही गलत काम करे तो बेटे ने किया तो क्या हुआ? यही बात हमारे देश पे लागु होती है क्योंकि यहाँ तो नेता ही भ्रष्ट हैं इन नेतओं का कहर तो डेंगू से भी भयावह होती है डेंगू

तो उपचार करने पर ख़त्म हो जातें है लेकिन राजनेताओ का कहर तो ऐसा बरपता है कि लोग न तो जीवित होतें हैं और न ही मृत मानो जीता -जागता , चलता -फिरता , बोलता -बैठता , कठपुतली हो जो नेताओं द्वारा नचाया जाता हो |

ये नेता रूपी कचरा जहाँ देखो वही मुंह मारने के फ़िराक में होता है न जाने कौन -कौन से घोटाले कर लेते हैं | चारा -घोटाला , 2G स्पेक्ट्रम -घोटाला , DCC – घोटाला , आय से अधिक संपत्ति रखने वाले भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से पीड़ित है ये नेता जिसका कोई इलाज ही नहीं है डॉक्टर के पास | दुर्भाग्यवश अगर इलाज किया भी जाता है तो बीमारी और बढ़ जाती है |चिंता का विषय ये है कि ये बीमारी दिन-प्रतिदिन बढ़ ही रही है जिसका इलाज सीबीआई , एनआईए और रॉ जैसे जाँच दलों से करवाया जाता है लेकिन इसमे भी कुछ भ्रष्ट डॉक्टर होते है जिसके कारण सही रोगी का पता ही नहीं चल पाता और जो रोगी नहीं है उसका इलाज कर दिया जाता है फिर जो असली रोगी है उसकी बीमारी इतनी भयानक रूप ले लेती है की सभी इस बीमारी की चपेट में आने लगते है और फिर शुरु हो जाता है देश में भ्रष्टाचार , आतंकवाद , नक्सलवाद , उग्रवाद , भूखमरी , बेरोजगारी और न जाने क्या – क्या ?

अगर इन सब से हम छुटकारा पाना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें इन नेताओ की चाल को समझना होगा |जो अपने स्वार्थ के लिए जनता को बहलाने का काम करते हैं और सत्ता-सीन होकर इन बीमारी को बढ़ावा देते है |

हमें इन दल -दल को ख़त्म करना होगा जो स्व-स्वार्थ के लिए जब मन हो एक नया दल बना लेते है और वादे पे वादे करते है अतः हमारे देश के नेता अगर निःस्वार्थ भाव से काम करें और लोकतंत्र की परिभाषा (जनता का जनता के लिए और जनता के द्वारा की गई शासन प्रणाली ) को फॉलो करें तो हमारा देश फिर से सोने की चिड़ियाँ और विश्व गुरु कहलाने लगेगी |

 

जय हिन्द

दुनिया में एक अजीब सा ट्रेंड शुरू हो चुका है, जो ना सिर्फ आने वाली पीढ़ी पर असर डाल रहा है, बल्कि हमारे इतिहास में शामिल लोगों के अस्तित्व पर भी सवाल उठा रहा है। दुनिया के जो भी फ्रीडम फाइटर्स हैं, चाहे वो भारत के महात्मा गांधी हों या फिर सोवियत यूनियन के जोसेफ स्टालिन, सभी के अस्तित्व पर, उनके फैसलों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस फेहरिस्त में चीन के जनक माओ ज़ेदोंग भी शामिल हैं।

आज लोग इनके फैसले और मानसिकता पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन क्या ये ज़रूरी नहीं कि इनके फैसलों पर राय बनाने से पहले उस दौर के हालात को भी समझने की कोशिश की जाए। क्यों ना ये समझने की कोशिश की जाए कि क्यों इनकी प्रतिमाएं लगाई गईं, इनके नाम से दिवस मनाए गए और क्यों इन धुरंधरों को इतिहास में ये दर्जा दिया गया। दरअसल इन तमाम कवायदों का एकमात्र मकसद आज की और आगे आने वाली पीढियों तक इन शख्सियतों की विचारधारा को पहुंचाना है, दुनिया को उनके योगदान से रूबरू कराना है।

इंसान के व्यक्तित्व में उसकी जड़ें काफी अहमियत रखती हैं, उसका इतिहास और अनुभव ही मिलकर उसका आने वाला भविष्य तय करता है। इतिहास के अनुभव आपके भविष्य के फैसलों को संवार सकते हैं। ऐसे में ऐसी शख्सियतों के योगदान पर सवाल उठाना इतिहास से बेइमानी करने जैसा है। दुनियाभर के फासिस्ट की सोच मिली-जुली सी ही है, माओ को मानने वाले जोसेफ स्टालिन का विरोध कर सकते हैं। अंबेडकर को जो मानते हैं, वो गांधी पर सवाल उठा सकते हैं, लेकिन सोच पर सवाल उठाने से समस्या का समाधान मिलना मुश्किल है। आप व्यवस्था को तो हटा सकते हैं लेकिन विकल्प क्या है ? सवाल उठाना आसान होता है लेकिन समाधान देना नहीं, और इन्हीं सवालों की वजह से आजतक मिडिल ईस्ट आग में झुलस रहा है।

जो डेमोक्रेटिक सोच रखते हैं, co-existence में विश्वास रखते है, वो विकल्प की तलाश करते हैं। सवाल सम्राट अशोक और अकबर पर भी उठ चुके हैं, जो तलवार के बूते देश नहीं बल्कि अपने बूते दिल जीतने का माद्दा रखते थे, ऐसे में सिर्फ सवाल उठाना कहां तक लाजिमी है। दरअसल इतिहास की गवाही ही लक्ष्य तक पहुंचने की कुंजी बन सकती है, अगर इतिहास से सबक नहीं लिया गया तो लक्ष्य हासिल करना मुश्किल हो जाएगा। चाहे वो एक इंसान का व्यक्तित्व हो या फिर देश का भविष्य।

(लेखक ज़ी मीडिया समूह के न्यूज चैनल इंडिया 24x7 के संपादक हैं)  

पेशावर: पाकिस्तान के  पेशावर में चूहे के काटने से एक शिशु की मौत के बाद.

प्रशासन ने चूहों का आतंक खत्म करने के लिए एक चूहे को मारने पर 25 रूपए का इनाम देने की घोषणा की.

सरकार ने तय किया है कि इस समस्या से निजात पाने के लिए आम लोगों को शामिल किया जाए.

 और हर चूहे को मारने पर प्रोत्साहन के तौर पर 25 रूपए दिए जाएं.

शहर का पानी एवं सफाई सेवा विभाग चार कस्बों में कुछ ऐसे केंद्र स्थापित करेगा जहां मारे गए.

 चूहे इकट्ठा किये जाएंगे और उन्हें मारने वालों को इनाम दिया जाएगा.

चूहे मारने वालों को उनकी इनाम राशि देने में मदद पहुंचाने के लिए मोबाइल सेवाएं भी शुरू की जाएंगी.

घर घर चूहों को मारने वाली दवा वितरित की जाएगी.

पेशावर के जिला नाजिम मुहम्मद आसिम ने बड़े चूहों के आतंक से निबटने के उपायों.

पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलायी थी. ये बड़े चूहे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं बल्कि.  लोगों पर हमला कर और उन्हें काटकर नुकसान पहुंचाते हैं. ये बड़े चूहे 22-30 सेंटीमीटर तक के हैं.

जैसलमेर: जैसलमेर जिले में एक थाना ऐसा भी है जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और जहां पुलिस कर्मियों के पास कोई काम ही नहीं है. कई बार पूरे साल में एक भी मुकदमा दर्ज नहीं होता.

इस थाने को 23 साल तक हेड कांस्टेबल ही संभालता रहा और अब जा कर इस थाने को थानेदार मिला है.

शाहगढ़ का यह थाना जैसलमेर में पाकिस्तान सीमा से सटा है, जहां 23 वर्ष में महज 55 मुकदमे दर्ज हुए हैं.

 और सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें एक भी मुकदमा रेप का नहीं है.

ये खूबी इस थाने को दूसरे थानों से अलग करता है.

थाना वीरान मरुस्थल क्षेत्र में है, जहां आसपास कोई आदमी मुश्किल से ही नजर आता है.

पुलिसकर्मियों का कहना है कि जब वह गश्त पर निकलते हैं, तब इक्का-दुक्का लोग मिलते हैं.

 अब पहली बार थाने की कमान सब इंस्पेक्टर को सौंपी गई है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार, साल 1993 में सीमा पार से तस्करी रोकने के लिए शाहगढ़ थाना खोला गया था.

 तारबंदी के बाद तस्करी पर लगाम भी लगी. सीमावर्ती क्षेत्र के इस थाने पर 200 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का जिम्मा है.

 इस थाने के अन्तर्गत दो पंचायतों की 10 हजार की आबादी आती है.

वर्ष 2016 में अब तक कोई मामला नहीं दर्ज हुआ. 2015 में सिर्फ दो मामले दर्ज हुए, वे भी सड़क दुर्घटना के.

वर्ष 2014 में तीन मामले दर्ज हुए, एक मारपीट का, दूसरा चोरी का और तीसरा सड़क दुर्घटना का.

राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कपिल गर्ग ने बताया .

कि थाने में बिजली सौर ऊर्जा से मिलती है और पानी बाहर से लाया जाता है.

उन्होंने बताया कि कभी साल भर मुकदमा दर्ज न हो लेकिन अंत में अगर एक मुकदमा दर्ज हो जाए.

 और उसका निस्तारण न हो तो भी वर्ष के अंत में पेंडेंसी का प्रतिशत 100 आता है.

पुलिस उपाधीक्षक नरेन्द्र कुमार दवे ने थाने में 23 साल बाद नियुक्ति होने पर कहा,

‘एएसआई स्तर का अधिकारी थाने का प्रभारी रहा है. थाने में दर्ज होने वाले मामले,

इन्स्पेक्टर स्तर के अधिकारी की उपलब्धता और कार्य सम्पादन के आधार पर इन्स्पेक्टर की नियुक्ति की जाती है.’

नई दिल्ली(16 फरवरी):आमतौर पर लोग यही मानते हैं कि आईआईटी के छात्र पढने के अलावा और कुछ काम नहीं करते। लेकिन आपकी इस सोच को आईआईटी रुड़की के 4 छात्र कुछ हद तक बदल सकते हैं। 

आईआईटी रुड़की के 4 लड़कों का डांस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है,

जिसे देखकर उनके बारे में आप भी अपनी सोच बदल देंगे।

वैलेंटाइन डे पर अपलोड किए गए इस वीडियो में 4 लड़के हॉलीवुड सिंगर एड शीरन के लेटेस्ट सॉग 'शेप ऑफ यू' पर डांस कर लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं। इस गाने को लड़कों ने खुद ही कोरियोग्रॉफ करके डांस किया है। चारों लड़के सिंगल हैं और अपने लिए लड़की को इंप्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं।

चारों लड़के एक ही लड़की को इंप्रेस करना चाहते हैं। इस डांस वीडियो को अंकुश राउत डायरेक्ट किया है। 13 फरवरी को इस वीडियो को यूट्यूब म्यूजिक चैनल Cinesec IITR के अकाउंट से अपलोड किया गया है, जिसके बाद अब तक 76000 ने अधिक लोग इसे देख चुके हैं।

 

 

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