विचार

कश्मीर पर भी सटीक बैठी अंक ज्योतिष डॉ मग्गो की भविष्यवाणी

देश में भारी उथल-पुथल का माहौल है, हर कोई जानना चहता है कि भारत की राजनीति की दिशा अब कहां जाएगी। इसी को लेकर हमने बात की जाने माने अंक ज्योतिष डॉ सुनील मग्गो से, जो पहले भी भारतीय राजनीती को लेकर सफल भविष्यवाणियां कर चुके हैं। डॉ सुनील मग्गो हमेशा 26 तारीख या मंगलवार को ही भविष्यवाणी करते हैं। इसके पहले जो 26 मार्च ,2019 को उनके द्वारा की गई भविष्यवाणी सटीक सिद्ध हुई थीऔर इकतरफा आये चुनाव के परिणाम और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी थी।

इसके बाद 26 मई,2019 को मंत्रिमंडल को लेकर भविष्यवाणी की वह भी सही साबित हुई।

मंत्रीमंडल में जेटली या पियूष गोयल के सिवा किसी तीसरे व्यक्ति को वित्त मंत्रालय मिलने की बात कही थी।अमित शाह गृह मंत्री बने और वित्त मंत्रालय भी मिला। किसी तीसरे व्यक्ति को गृह मंत्रालय मिला 

अमित शाह का कार्यकाल गृह मंत्री के रूप में कैसा रहेगा के उत्तर में डॉ मग्गो ने भविष्यवाणी की थी की गृह मंत्री के रूप में अमित शाह बहुत सफल रहेंगे और नई उचाइयां छुएंगे। भाजपा पूरे देश में और बलशाली होगी। कश्मीर समस्या का निदान होगा कभी।
डॉ मग्गो ने कहा था कि अंक ज्योतिष के अनुसार अप्रैल ,2020 तक कश्मीर समस्या का समाधान एक निर्णायक दौर तक पहुँच जायगा जिसमें अमित शाह का बहुत बड़ा योगदान होगा और अमित शाह वर्तमान  युग के सरदार पटेल के रूप में  स्थापित होंगे।

धारा 370 के बाद बदले हुए वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर डॉ मग्गो से बात की हमारी संवाददाता दीपांशी ने।

प्रश्न: भारत का राजनीतिक परिदृश्य अब क़्या कह रहा है।

उत्तर: अगस्त माह का नंबर 8 है जिसके स्वामी शनिदेव हैं।
मुझे लगता है अगस्त में राजनितिक उथल पुथल हो सकती है।

प्रश्न: कृपया विस्तार से बताएँ।

उत्तर: कुछ बड़े राजनितिक और आर्थिक फ़ैसले लिए जा सकते हैं जिनके दूरगामी परिणाम होंगे।

कुछ बड़े राजनेताओं जिनके वर्ष का योग 8 बनता है उन पर कष्ट आ सकता है।

प्रश्न: कांग्रेस पार्टी का क्या भविष्य लगता है आपको?

उत्तर: कांग्रेस धरातल की ओर जा रही है। अगस्त में कांग्रेस पार्टी विभाजित हो सकती है और कई बड़े नेता थाम सकते हैं भाजपा का दामन।

प्रश्न: डॉ साहब ये तो बहुत ही चौकाने वाली भविष्यवाणी है इसका कोई आधार।

उत्तर:इसके दो कारण है
पहला मोदी जी का नंबर है 8...और भारत स्वतंत्र हुआ 15.8.1947 जिसका योग भी 8 बनता है। भारत को स्वतंत्र हुए 71 वर्ष हो गए है जिसका योग भी 8 बनता है। अगस्त माह का नंबर भी 8 है।.

दूसरा कारण है अमित शाह जी का नंबर है 4 और भाजपा भी 40वें वर्ष में पदार्पण कर चुकी है।

धन्यवाद और आपसे फिर मिलेंगे एक और भविष्यवाणी को लेकर।

 

आइये बात करते हैं प्रसिद्ध अंक ज्योतिषी डॉ सुनील मग्गो से जो हमेशा 26 तारीख या मंगलवार को ही भविष्यवाणी करते हैं।जो 26 मार्च ,2019 को की थी फिर साबित हुई सच और इकतरफा आये चुनाव के परिणाम और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में बनी नई सरकार।

26 मई,2019 को मंत्रिमंडल को लेकर भविष्यवाणी भी सच साबित हुई।

अमित शाह ही बने गृह मंत्री और वित्त मंत्रालय भी मिला जेटली जी या पियूष गोयल के सिवा किसी तीसरे व्यक्ति को।


अमित शाह का कार्यकाल गृह मंत्री के रूप में कैसा रहेगा के उत्तर में आपने भविष्यवाणी की थी की गृह मंत्री के रूप में अमित शाह बहुत सफल रहेंगे और नई उचाइयां छुएंगे।

भाजपा पूरे देश में और बलशाली होगी।

कश्मीर समस्या का निदान होगा कभी।
आपने कहा था कि अंक ज्योतिष के अनुसार अप्रैल ,2020 तक कश्मीर समस्या का समाधान एक निर्णायक दौर तक पहुँच जायगा जिसमे अमित शाह का बहुत बड़ा योगदान होगा।

और अमित शाह वर्तमान युग के सरदार पटेल के रूप में स्थापित होंगे।

कश्मीर समस्या का समाधान तो कल 5अगस्त ,2019 को ही कर दिया अमित शाह जी ने...

प्रश्न : आपने पिछले साक्षात्कार में कहा था कि आप अधिकतर भविष्यवाणी मंगलवार या 26 तारीख़ को करते हैं परंतु इस बार हम उत्सुकतावश आपके पास 6 अगस्त ,2019 को ही साक्षात्कार करने आ गए।

आपने जो कहा था वो सब सच साबित हुआ।

प्रश्न: क्या कहना है आपका प्रधान मंत्री मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी के बारे में।

उत्तर: संजोग से आज भी मंगलवार है और तिथि 6.8.2019 है जिसका योग 26 बनता है।
अभी तो अमित शाह जी ने पहला कदम उठाया है।
जैसा की मैंने कहा था कि अप्रैल 2020 तक कश्मीर समस्या का निदान हो जाएगा ।
अब भारत एक नई शक्ति के साथ उभरेगा।
और बदलेगा भारत और पाकिस्तान का नक़्शा।

प्रश्न: आपने पहले ही अमित शाह जी के बारे में बहुत अच्छी भविष्यवाणी की हैं।
लगता है आपका विशेष स्नेह है उनसे।

उत्तर: जी, शायद अंको का और दिन का असर है।
प्रधान मंत्री मोदी जी की तरह मेरा नम्बर भी 8 है और अमित भाई शाह की तरह मेरा जन्म दिन भी बृहस्पति वार का है।

यही कारण है कि अमित शाह जी से लगाव का।

डॉ साहब आपका धन्यवाद और आपसे फिर मिलेंगे एक और भविष्यवाणी को लेकर।


आइये बात करते हैं प्रसिद्ध अंक ज्योतिषी डॉ सुनील मग्गो से भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारों के बारे में

प्रश्न: आपके द्वारा विराट कोहली के बारे में की गई हर भविष्यवाणी अभी तक सच सिद्ध साबित हुई। कौन होगा भारत का चमकने वाला अगला क्रिकेट का सितारा।

उत्तर: मुझे लगता है वो नाम है ऋषभ पन्त जो भारतीय क्रिकेट में धूमकेतु की तरह उभरेगा और धूम मचा देगा।

प्रश्न: ऐसा क्या विशेष है ऋषभ में वो तो अभी तक भारतीय टीम का हिस्सा भी नहीं है।

उत्तर: ऋषभ जल्दी ही भारतीय टीम का हिस्सा बनेगा और उसके कैरियर का आरम्भ होगा वो दिन शनिवार होगा।

प्रश्न: विराट और ऋषभ में क्या समानता देखते हैं आप।

उत्तर: विराट और ऋषभ दोनों का जन्म शनिवार का है।

विराट के जन्म का वर्ष है 1988 जिसका योग 26 बनता है।

ऋषभ के जन्म का वर्ष है 1997 जिसका योग भी 26 बनता है।
नंबर 26 के स्वामी शनि हैं।

दोनों को पिता का सुख नहीं मिल पाया।

प्रश्न: क्या ऋषभ खेलेंगे अगले वर्ष होने वाला वर्ल्ड कप में।

उत्तर: अवश्य, कुछ अड़चन आ सकती है अंतत: ऋषभ अवश्य खेलेगा वर्ल्ड कप।

प्रश्न: कैसे देखते है आप ऋषभ का भविष्य।

उत्तर: ऋषभ आने वाले समय में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे और अपने को स्थापित करेंगे।

प्रश्न: आपने भविष्यवाणी की थी कि विराट कोहली भारतीय टीम के कप्तान बनेंगे जो सच साबित हुई।
क्या कहना है आपका ऋषभ के बारे में।

उत्तर: अभी तो ऋषभ की टीम में जगह भी नहीं बनी।
लेकिन मुझे विश्वास है कि वो भारतीय टीम का हिस्सा भी बनेगा और विराट की तरह ही भारतीय टीम का कप्तान भी ।

प्रश्न: इतने यकीन के साथ आप ये सब कैसे कह सकते हैं।

उत्तर: ये सब अंक ज्योतिष के आधार पर कह रहा हूँ।
मैंने विराट के बारे में पहला ट्वीट किया था 19 मार्च, 2012 को।

और जब जब विराट का प्रदर्शन ख़राब हुआ मैंने विराट के लिए शनि आराधना की।
मैं आजकल ऋषभ के लिए भी शनि आराधना करता हूँ और मुझे यकीन है वो बनेगा भारतीय टीम का हिस्सा।
और बनेगा कप्तान 2024 में।

प्रश्न: लगता है आपका बहुत लगाव है दोनों से।

उत्तर: मेरे स्वामी भी शनि हैं अतः ये स्वाभाविक है।
मुझे दोनों अपने बच्चों की तरह लगते हैं।

डॉ साहब इतना ज्ञान होते हुए भी कितने सरल ह्रदय हैं आप।
धन्यवाद्

भारत हर साल 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।

यह दिन जहां हमारे आजाद होने की खुशी लेकर आता है वहीं इसमें भारत के खण्ड खण्ड होने का दर्द भी छिपा होता है।

वक्त के गुजरे पन्नों में भारत से ज्यादा गौरवशाली इतिहास किसी भी देश का नहीं हुआ।

लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप से ज्यादा सांस्कृतिक राजनैतिक सामरिक और आर्थिक हमले भी इतिहास में शायद किसी देश पर नहीं हुए।

और कदाचित किसी देश के इतिहास के साथ इतना अन्याय भी कहीं नहीं हुआ।

वो देश जिसे इतिहास में 'विश्व गुरु' के नाम से जाना जाता हो, उस देश के प्रधानमंत्री को आज  "मेक इन इंडिया" की शुरूआत करनी पड़रही है।

'सोने की चिड़िया' जैसे नाम जिस देश को कभी दिया गया हो, उसका स्थान आज विश्व के विकासशील देशों में है।

शायद हमारा वैभव और हमारी  समृद्धि की कीर्ति ही हमारे पतन का कारण भी बनी।

भारत के ज्ञान और सम्पदा के चुम्बकीय आकर्षण से विदेशी आक्रमणता लूट के इरादे से इस ओर आकर्षित हुए।

वे आते गए और हमें लूटते गए।

हर आक्रमण के साथ चेहरे बदलते गए लेकिन उनके इरादे वो ही रहे

वो मुठ्ठी भर होते हुए भी हम पर हावी होते गए

हम वीर होते हुए भी पराजित होते गए

क्योंकि हम युद्ध कौशल से जीतने की कोशिश करते रहे

और वे जयचंदों के छल से हम पर विजय प्राप्त करते रहे

हम युद्ध भी ईमानदारी से लड़ते थे और वे किसी भी नियम को नहीं मानते थे

इतिहास गवाह है, हम दुशमनों से ज्यादा अपनों से हारे हैं शायद इसीलिए किसी ने कहा है,

" हमें तो अपनों ने लूटा , ग़ैरों में कहाँ दम था,

हमारी कश्ती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था  "

जो देश अपने खुद की गलतियों से नहीं सीखा पाता वो स्वयं इतिहास बन जाता है

हमें भी शायद अपनी इसी भूल की सज़ा मिली जो हमारी वृहद सीमाएं आज इतिहास बन चुकी हैं।

वो देश जिसकी सीमाएं उत्तर में हिमालय दक्षिण में हिन्द महासागर पूर्व में इंडोनेशिया और पश्चिम में ईरान तक फैली थीं ,आज  सिमट कर रह गईं और इस खंडित भारत को हम आजाद भारत कहने के लिए विवश हैं।

अखंड भारत का स्वप्न सर्वप्रथम आचार्य चाणक्य ने देखा था और काफी हद तक चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर इसे यथार्थ में बदला भी था। तब से लेकर लगभग 700 ईसवी तक भारत ने इतिहास का स्वर्णिम काल अपने नाम किया था।

लेकिन 712 ईस्वी में सिंध पर पहला अरब आक्रमण हुआ फिर 1001 ईस्वी से महमूद गजनी , चंगेज खान ,अलाउद्दीन खिलजी ,मुहम्मद तुगलक ,तैमूरलंग , बाबर और उसके वंशजों द्वारा भारत पर लगातार हमले और अत्याचार हुए।

1612 ईस्वी में जहाँगीर ने अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की इजाज़त दी।

यहाँ इतिहास ने एक करवट ली और व्यापार के बहाने अंग्रेजों ने पूरे भारत पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया।

लेकिन इतने विशाल देश पर नियंत्रण रखना इतना आसान भी नहीं था यह बात उन्हें समझ में आई 1857 की क्रांति से ।

इसलिए उन्होंने "फूट डालो और राज करो" की नीति अपनाते हुए धीरे धीरे भारत को तोड़ना शुरू किया।

1857 से 1947 के बीच अंग्रेजों ने भारत को सात बार तोड़ा ।

1876 में अफगानिस्तान

1904 में नेपाल

1906 में भूटान

1914 में तिब्बत

1935 में श्रीलंका

1937 में म्यांमार

1947 में बांग्लादेश और पाकिस्तान

लेकिन हम भारतवासी अंग्रेजों की इस कुटिलता को नहीं समझ पाए कि उन्होंने हमारे देश की भौगोलिक सीमाओं को ही नहीं तोड़ा, बल्कि हमारे समाज, हमारी भारतीयता, इस देश की आत्मा को भी खण्डित कर गए।

जाते जाते वे इस बात के बीज बो गए कि भविष्य में भी भारत कभी एक न रह पाए।बहुत ही चालाकी से वे हिन्दू समाज को जाती क्षेत्र और दल के आधार पर जड़मूल तक विभाजित कर गए।

जरा सोचिए कि क्यों जब हमसे आज हमारा परिचय पूछा जाता है तो हमारा परिचय ब्राह्मण बनिया ठाकुर मराठी कायस्थ दलित कुछ भी हो सकता है लेकिन भारतीय नहीं होता ?

अंग्रेजों के इस बीज को खाद और पानी दिया हमारे नेताओं ने जो देश के विकास की नहीं वोट बैंक की राजनीति करते आ रहे हैं।

जब  इक्कीसवीं सदी के इस ऊपर से, एक किन्तु भीतर ही भीतर विभाजित भारत की यह तस्वीर अंग्रेज देखते होंगे तो मन ही मन अपनी विजय पर गर्व महसूस करते होंगे।

हम भारत के लोग 15 अगस्त को किस बात का जश्न मनाते हैं?

आजादी का?

लेकिन सोचो कि हम आजाद कहाँ हैं?

हमारी सोच आज भी गुलाम है !

हम गुलाम हैं अंग्रेजी सभ्यता के जिसका अन्धानुकरण हमारी युवा पीढ़ी कर रही है।

हम गुलाम हैं उन जातियों के जिन्होंने हमें आपस में बाँटा हुआ है और हमें एक नहीं होने देती ।

हम गुलाम हैं अपनी सरकार की उन नीतियों की जो इस देश के नागरिक को उसके धर्म और जाति के आधार पर आंकती हैं उसकी योग्यता के आधार पर नहीं

हम गुलाम हैं उस तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के जिसने हमें बाँटा हुआ है धर्म के नाम पर

हम गुलाम हैं हर उस सोच के जो हमारे समाज को तोड़ती है और हमें एक नहीं होने देती।

हम आज भी गुलाम हैं अपने निज स्वार्थों के जो देश हित से पहले आते हैं।

अगर हमें वाकई में आजादी चाहिए तो सबसे पहले अपनी उस सोच अपने अहम से हमें आजाद होना होगा जो हमें अपनी पहचान "केवल भारतीय" होने से रोक देती है।

हमें आजाद होना पड़ेगा उन स्वार्थों से जो देश हित में रुकावट बनती हैं।

अब वक्त आ गया है कि हम अपनी आजादी को भौगोलिक अथवा राजनैतिक दृष्टि तक सीमित न रखें।

हम अपनी आज़ादी अपनी सोच में लाएँ । जो सोच और जो भौगोलिक सीमाएं हमें अंग्रेज दे गए हैं उनसे बाहर निकलें।

विश्व इतिहास से सीखें कि जब जर्मनी का एकीकरण हो सकता है, जब बर्लिन की दीवार गिराई जा सकती है, जब इटली का एकीकरण हो सकता है, तो भारत का क्यों नहीं?

चन्द्रशेखर आजाद भगतसिंह सुखदेव महारानी लक्ष्मीबाई मंगल पांडे रामप्रसाद बिस्मिल सुभाष चंद्र बोस अश्फाकउल्लाह खान ने अपनी जान अखंड भारत के लिए न्योछावर की थी खण्डित भारत के लिए नहीं।

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